भावपूर्ण गीतों के साथ हुई सामा-चकेवा की विदाई - AKJ NEWS | Online Hindi News Portal

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Saturday, November 4, 2017

भावपूर्ण गीतों के साथ हुई सामा-चकेवा की विदाई

बोकारो। मिथिलांचल में मनाये जाने वाला भाई-बहन के स्नेह का अतिपावन पर्व सामा-चकेवा शुक्रवार देर शाम बोकारो में संपन्न हुआ। बोकारो की प्रतिष्ठित संस्था मिथिला सांस्कृतिक परिषद के तत्वावधान में नगर के सेक्टर-4ई स्थित मिथिला अकादमी पब्लिक स्कूल में सामा-चकेवा पर्व का भव्य आयोजन किया गया। मैथिल-परम्परानुसार समदाओन आदि भावपूर्ण पारंपरिक गीतों के साथ सामा-चकेवा को भावनीभी विदाई दी गयी। चास-बोकारो के विभिन्न भागों से बड़ी संख्या में पहुंची महिलाओं ने मिट्टी निर्मित सामा-चकेवा की विधियां पूरी कीं। परंपरानुसार सामा-चकेवा, सतभइया, बृंदावन, चुगला, ढोलिया बजनिया, बन तितिर, पंडित और अन्य मूर्तियों के खिलौने वाले डाला को लेकर महिलायें जुटीं और सन (पटुआ) से बने चुगला को जलाया। उसका मुंह झुलसाया। इसके बाद उन्हें सामूहिक रूप से विसर्जित किया। प्रारंभ में आगंतुकों का स्वागत करते हुए परिषद् के सांस्कृतिक कार्यक्रम निदेशक अरुण पाठक ने मिथिलांचल की सांस्कृतिक विशिष्टता पर आधारित गीत सुनाकर सबका मन जीत लिया। इस अवसर पर मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष रामाधार झा, मिथिला सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष कुमुद कुमार ठाकुर, महासचिव राजेन्द्र कुमार सहित हरिमोहन झा, सुनील मोहन ठाकुर, विवेकानंद झा, आर के कर्ण, राजीव कंठ, माया नन्द झा, श्रीमोहन झा, संतोष कुमार मिश्र, पी के झा चंदन, मनोज कुमार झा, सुदीप कुमार ठाकुर, मधु ठाकुर, बी राय, गंगेश कुमार पाठक, श्रवण झा, गोविन्द कुमार झा, शंभु झा, किरण मिश्र, पिंकी झा, सुनीता झा, भारती झा, जयंती पाठक, श्वेता झा, शीला मिश्रा, कुमकुम झा, पूनम सिंह, गणेश झा, काली कान्त मिश्र आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि मिथिला की महान लोक संस्कृति से जुड़ी भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक यह पर्व मात्र मिथिला में ही मनाये जाने की परंपरा रही है। इसकी चर्चा विष्णु-पुराण में भी मिलती है।
-अरुण पाठक

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