मैथिल बहनों के घर मची है सामा-चकेवा की धूम - AKJ NEWS | Online Hindi News Portal

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Thursday, November 2, 2017

मैथिल बहनों के घर मची है सामा-चकेवा की धूम

बोकारो: ‘धान... धान... छै, भैया कोठी धान छै। चुगिला कोठी भुस्सा छै,  भैया मुख पान छै, चुगिला मुख अंगोर ढारू हो।’ इसी तरह के गीतों के साथ भाई-बहन के स्नेह और पति-पत्नी के स्वधर्म निर्वहन से जुड़े मिथिला के पारम्परिक पर्व सामा-चकेवा की इन दिनों बोकारो के समस्त मैथिल बहनो के घर धूम मची है। विधिपूर्वक गीतनाद किये जा रहे हैं। आगामी तीन नवम्बर को मैथिल पंचांगानुसार विधिवत विसर्जन के साथ यह पर्व संपन्न होगा। बोकारो में मैथिलों की प्रतिष्ठित संस्था मिथिला सांस्कृतिक परिषद हर साल की भांति इस बार भी सामा-चकेवा पर्व पूरे उत्साह व भव्यता के साथ मनाने जा रही है। तीन नवंबर (शुक्रवार) की संध्या साढ़े छह बजे से लेकर साढ़े आठ बजे तक सेक्टर-4ई स्थित परिषद के सभागार में भव्य पारम्परिक आयोजन किया जायेगा। इसके तहत मैथिल महिलायें व बहनें गीतनाद के साथ सामा-चकेवा का विसर्जन करेगीं। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे। परिषद के सचिव राजेन्द्र कुमार ने अधिकाधिक मैथिलों से उक्त कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है।
 प्राचीन काल से मनाया जा रहा सामा-चकेवा
झुलसाया जाता है झूठी शिकायत करने वाले चुगले का मुंह
सामा-चकेवा पर्व मिथिला में आदि काल से मनाया जाता रहा है। छठ महापर्व के बाद से शुरू इस पावन में शाम होते ही गांव-घरों के आंगन मे  भगवान और भाई-बहनों का गीतनाद प्रारंभ हो जाता है। पद्मपुराण मे सूत-सोन संवाद के रूप मे सामा-चकेवा कथा का उल्लेख है। कहा जाता है कि भ गवान श्रीकृष्ण ने अपनी पुत्री सामा को उनके बारे में चूड़क (चुगला) द्वारा मिली झूठी शिकायत पाने पर पक्ष बन वृन्दावन मे विचरण करने का श्राप दे दिया था। इसकी जानकारी कर मिलने पर सामा के पति चारूवत्र भी भगवान शंकर से पक्षी बनने का वरदान पाकर वृन्दावन मे उनके साथ विचरण करने लगे। यह जानकारी जब सामा के भाई साम्ब को मिली तो उन्होंने भ गवान विष्णु की आराधना कर अपने बहन-बहनोई को शापमुक्त करा मनुष्य रूप देने का वरदान प्राप्त किया। भगवान ने कहा कि कार्तिक मास में उनकी बहन आयेगीं और पूर्णिमा को विदा  हो जायेंगी। उसके बाद से यह पावन मनाया जाता रहा है। इसमें झूठी शिकायत करने के कारण चूड़क (चुगला) का अग्नि- दहन किया जाता है। मिट्टी के सामा-चकेवा, साम्ब, सप्तर्षि, आदि बनाये जाते हैं। गांव की सभी स्त्रियां एक सप्ताह तक विभिन्न गीत-नाद के साथ भाई-बहन  पति-पत्नी की आयु और अपनी सुहाग के लिये भ गवान सं प्रार्थना करती हैं। सामा-चकेवा, सत इया, बृंदावन, चुगला, ढालिया बजनिया, बन तितिर, पंडित और अन्य  मूर्ति खिलौना का डाला लेकर बहनें जोते हुए खेत मे खेलती हैं। सन (पटुआ) से बने चुगला को जलाया जाता है। उसका मुंह झुलसाया जाता है। भाई-बहन का यह पावनि पर्व छठ के खरना दिन शुरू होकर पूर्णिमा के दिन विसर्जन संग संपन्न होता है।
- अरुण पाठक

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