झारखंड

अटलजी के योगदान का ऋणी रहेगा मिथिला-मैथिली

मिथिला सांस्कृतिक परिषद की श्रद्धांजलि सभा आयोजित

बोकारो:बोकारो में मैथिलों की प्रतिष्ठित संस्था मिथिला सांस्कृतिक परिषद की ओर से भूतपूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर रविवार को परिषद-संचालित मिथिला अकादमी पब्लिक स्कूल के सभागार में एक श्रद्धांजलि-सभा का आयोजन किया गया। परिषद के पदाधिकारियों सहित कार्यकारिणी के सभी सदस्यों व अन्य लोगों ने बारी-बारी से अटलजी के चित्र पर पुष्पार्चन कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने मिथिला-मैथिली के विकास में अटलजी के अवदानों पर प्रकाश डाला। परिषद के पूर्व सचिव हरिमोहन झा ने कहा कि मैथिली को अष्टम अनुसूची में शामिल कर इसे जहां सशक्त बनाया, वहीं कोसी नदी पर पुल की दशकों पुरानी मांग पूरी कर सहरसा व दरभंगा की दूरी पाटते हुए नजदीकी बढ़ाने का काम किया। न केवल मिथिला, बल्कि पूरा देश उनके अवदानों को लेकर सदैव ऋणी बना रहेगा। श्री झा ने देश के सामरिक व आर्थिक विकास में भी बाजपेयीजी की भूमिका को अनन्य बताया। वर्तमान सचिव राजेन्द्र कुमार ने वाजपेयीजी को धरती का सूरज-चांद बताते हुए उनके बताये रास्तों पर चलने तथा उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संदेश दिया। उपाध्यक्ष अनिल कुमार व कवितेश कुमार अटलजी को भारतीय राजनीति का ध्रुवतारा बताते हुए राष्ट्रीय विकास में उनकी भूमिका पर चर्चा की। अध्यक्ष कुमुद कुमार ठाकुर ने स्व. वाजपेयी के साहित्यिक, सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन की विशिष्टताओं पर प्रकाश डालते हुए उन्हें एक अद्वितीय नेतृत्वकर्ता बताया। अंत में सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना की। कार्यक्रम का संचालन सुनील मोहन ठाकुर ने किया। मौके पर रवीन्द्र झा, राज कृष्ण राज, रंजन कुमार कर्ण, विजय कुमार, गणेश झा, मनोज झा, विवेकानंद झा, अरुण कुमार पाठक, संतोष कुमार आदि मौजूद थे।

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