बिहार

दरभंगा में पांच दिवसीय तरंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आगाज़

महामहिम ने जनक, याज्ञवल्क्य से लेकर विद्यापति, दिनकर की चर्चा करते हुए मिथिला की महान भूमि का नमन किया

दरभंगा: बिहार की पहचान इसकी सांस्कृतिक विरासत है। अंतर विश्वविद्यालय सांस्कृतिक
महोत्सव ‘‘तरंग’’ बिहार की कला संस्कृति की विरासत से नई पीढ़ी को जोड़ने का एक महत्वाकांक्षी प्रयास है। बिहार के राज्यपाल – सह-कुलाधिपति श्री लालजी टंडन ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा में आयोजित पांच दिवसीय बिहार अंतर विश्वविद्यालय सांस्कृतिक महोत्सव ‘तरंग’-2018 का उद्धघाटन करते हुए उपर्युक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि अपनी परंपरा के जुड़ते हुए वैश्विक प्रतिस्पद्र्धा में सहभागिता होनी चाहिए । महामहिम ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय परंपरा से गहराई से जुड़कर गुणात्मक शिक्षा की वैश्वविक प्रतिस्पर्द्धा के लिए तत्पर है। महामहिम ने जनक, याज्ञवल्क्य से लेकर विद्यापति, दिनकर की चर्चा करते हुए मिथिला की महान भूमि का नमन किया। उन्होंने कहा कि सर्वत्र अभाव है, विपन्नता है। समाज में भ्रष्टाचार व्याप्त है। हमें इनसे मुक्ति का उपक्रम करना चाहिए। महामहिम ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि तरंग में 27 प्रकार की प्रतिस्पद्र्धाओं का आयोजन किया जा रहा है। तरंग के अन्तर्गत इतनी स्पर्द्धाएं पहली बार आयोजित हो रही हैं।
ललित नाराण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र कुमार सिंह ने महामहिम का स्वागत करते हुए कहा कि कुलाधिपति महोदय ने पहली बार मिथिला की धरती पर पधारकर कृतकृत्य कर दिया है। डाॅ. सिंह ने कहा कि तरंग का यह आयोजन सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर शिक्षा के तीसरे आयाम को साकार कर रहा है। समारोह के विशिष्ठ अतिथि महामहिम के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह ने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि तरंग और एकलव्य जैसे कार्यक्रम छात्र-छात्राओं के व्यक्त्वि के विकास के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि हमें शामियाने पर कम और कलाकारों पर अधिक खर्च करना चाहिए। आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए सरकार के साथ ही सिविल सोसाईटी को शामिल किया जाना चाहिए। श्री सिंह ने महामहिम कुलाधिपति की क्रियाषीलता की चर्चा करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सत्र 2018-19 के समाप्त होते-होते बिहार के विश्वविद्यालयों के सत्र नियमित हो जाएंगे।

उद्धघाटन सत्र को ए.आई.यू. के संयुक्त सचिव सैम्सन डेविड ने संबोधित करते हुए कहा कि अखिल भारतीय स्तर के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की निरंतर सहभागिता रही है । इसलिए यहाँ तरंग का आयोजन स्वाभाविक ही है। तरंग के उद्धाटन के अवसर पर बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, बी.एन.एम.यू. मधेपुरा, के.एस.डी.एस.यू, दरभंगा, मौलाना मज़रूल हक़ अरबी फारसी विश्वविद्यालय, पटना के कुलपति समेत कई विश्वविद्यालयों के प्रतिकुलपति, कुलसचिव एवं अध्यक्ष, छात्र कल्याण उपस्थित थे। कुलपति प्रो. एस.के. सिंह ने मिथिला की परंपरा के अनुरूप महामहिम एवं मंचासीन अन्य अतिथियों का पाग, चादर एवं प्रतीक चिन्ह से सम्मानित किया। प्रति-कुलपति डाॅ. जयगोपाल ने श्री सैम्सन डेविड को पाग,चादर एवं प्रतीक चिन्ह से सम्मानित किया। महामहिम कुलाधिपति एवं अन्य मंचासीन अतिथियों ने तरंग – 2018 के अवसर पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन किया। विश्वविद्यालय के संगीत एवं नाट्य विभाग की छात्राओं ने प्रो. लावण्य कीर्ति सिंह ‘काव्या’ के निर्देशन में राष्ट्रगान एवं विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया। कुलसचिव कर्नल (से.नि.) निशीथ कुमार राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

उद्धाटन सत्र में प्रतिभागी विश्वविद्यालयों की आंचलिक विशेषताओं को दर्शाते हुए आकर्षक झाकियां निकाली गयी जिसकी मुक्त कंठ से प्रशंसा की गयी। इस अवसर पर स्थानीय विधायक श्री संजय सरावगी, विधान पार्षद डाॅ. दिलीप कुमार चैधरी, पूर्व विधान पार्षद डाॅ. विनोद कुमार चौधरी समेत बड़ी संख्या में पूर्व कुलपति, अभिषद् एवं अधिषद् के सदस्य, संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, प्रधानाचार्य समेत छात्र/छात्राएं उपस्थित थे।

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