पश्चिम बंगाल

मुद्रा आर्ट्स द्वारा काव्योत्सव -नाट्योत्सव का आयोजन

नाट्य-अभिनय, गीत, कविता और संवाद का अद्भुत संगम

कोलकाता की नाट्य संस्था “मुद्रा आर्ट्स” द्वारा जीवनानंद सभागार में काव्योत्सव-नाट्योत्सव का आयोजन किया गया। बड़े ही रोचक तरीके से आयोजित किये गए इस कार्यक्रम में रंगमंच , संगीत एवं साहित्य का अद्भुत समागम हुआ।
उपस्थित सभी कलाकारों द्वारों आन्गिकम गाकर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी।
इस पुरे कार्यक्रम को कलम की शक्ति को समर्पित करते हुए “दिनकर” जी की रचना “कलम आज उनकी जय बोल” का सहगान हुआ।
कार्यक्रम का पहला सत्र था “रंग मंच की कविता” जिसमें महाभारत के चरित्रों पर आधारित डॉ धर्मवीर भारती द्वारा रचित “अंधायुग” का नाट्य रूपांतर हुआ।
प्रस्तुतीकरण: प्रज्ञा गुप्ता, दिनेश वडेरा, अशोक मेहरा, दिलीप दवे।
इसी सत्र का दूसरा हिस्सा था “काव्याभिनय” जिसमें सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता “हंसा ज़ोर से” की प्रस्तुति की गयी, जिसमें काव्य पाठ किया दिलीप दवे ने और अभिनय द्वारा उसे प्रस्तुत किया विजया कोठारी ने।
इसके बाद “रंगमंच काव्यगान” हुआ जिसमें रंगमंच पर नाटक के दौरान गाये गए गीतों को अपने कर्णप्रिय आवाज़ में गाया करुणा ठाकुर व अशोक सिंह ने।
इस सत्र का संचालन किया रंगकर्मी दिनेश वडेरा ने , विशेष उपस्थिति रही रंगकर्मी “अशोक सिंह” की
बच्चन जी की कविता के सहगान से शुरू हुआ दूसरा सत्र स्वरचित कविताओं का था जिसके हिंदी भाषा के सत्र का संचालन किया युवा कवयित्री अनु नेवटिया ने तथा अंग्रेजी भाषा के सत्र का संचालन किया अभिनेत्री व युवा कवयित्री प्रज्ञा गुप्ता ने।
इस सत्र में मंच पर विशेष उपस्थिति रही वरिष्ठ साहित्यकार रावेल पुष्प की। काव्य पाठ करने वाले कवियों में शामिल रहे मौसम , अल्ताफ , दीपक सिंह , दीपक मालाकार , अंकेश पांडेय , मनीष झा, अजय अग्रवाल व कवयित्रियों में शामिल रहीं सविता पोद्दार , नीतू सिंह , आँखी दास , विजया कोठारी, अनु नेवटिया , प्रज्ञा गुप्ता , अंजलि दोषी।
शलभ श्री रामचंद्र के इंकलाबी सहगान से शुरू हुआ कार्यक्रम का अगला भाग जिसमें अभिनेता दिलीप दवे द्वारा “अश्वत्थामा” पर एक काव्य नाटक की प्रस्तुति हुई ।
कार्यक्रम के तीसरे सत्र में “सोशल मीडिया और क्रिएटिविटी” विषय पर चर्चा की गयी जिसका संचालन किया दिनेश वडेरा ने , मंच पर विशेष उपस्थिति रही प्रसिद्ध नाटक समीक्षक प्रेम कपूर की। इस सत्र के प्रमुख वक्ता थे प्रदीप कलानोरिया व त्यासा विश्वास ।
अंत में प्रेम कपूर ने इस पुरे कार्यक्रम पर अपना वक्तव्य रखा और युवाओं को और बेहतर करने के लिए कुछ सलाह भी दिए।
समापन सत्र में मनीषा मालानी द्वारा गुलज़ार की एक कविता का काव्य पाठ किया गया, दीपक और रोहित द्वारा गोपाल दास नीरज की एक कविता का पाठ किया गया , व कुछ छात्राओं द्वारा निदा फ़ाज़ली और गोपालदास नीरज के दोहों की प्रस्तुतीकरण की गयी जिसमें शामिल रहीं संगीता कुमारी साव , पुतुल रजक , निक्की कुमारी प्रसाद , प्रीती कुमारी प्रसाद , चांदनी साव व मनीषा कुमारी ।

इसके साथ ही पर्यवेक्षक के रूप में गरिमामयी उपस्थिति रही सर्वश्री सूर्यकांत तिवारी एवं विमल शाह की ।
इस उत्सव की एक खासियत यह भी थी की वरिष्ठ एवं नवोदित कलाकारों ने मिलकर इसे सजाया था, जिससे हम कह सकते हैं की कलात्मक संस्कृति की तरुणाई का मौसम कभी जा नहीं सकता ,वरिष्ठ गुणीजन के मार्गदर्शन में और नयी प्रतिभा के समर्पण से ये सदैव निखरता और खिलता रहेगा। कलाप्रेमियों के लिए ऐसे कार्यक्रम किसी तोहफे से कम नहीं , होली के पहले साहित्य एवं रंगमंच के रंगों में रंगना अविस्मरणीय रहेगा।

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