पश्चिम बंगाल

उपन्यास रावण : शिखर से शून्य तक का विमोचन

विमोचन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरी नाथ त्रिपाठी ने किया

कोलकाता: महामहिम राज्यपाल श्री केशरी नाथ त्रिपाठी ने एकता बृजेश गिरि द्वारा रचित उपन्यास रावण : शिखर से शून्य तक का विमोचन किया। महामहिम ने लेखिका की लेखन शैली की प्रशंसा करते हुए उन्हें शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद दिया तथा लगातार लिखते रहने की सलाह दी।

लेखिका ने अपने उपन्यास का परिचय देते हुए कहा कि रावण, एक ऐसा चरित्र जो प्रारम्भ से अंत तक विस्मयकारक रहा है, जिसके संबंध में समाज में कई भ्रांतियां बनीं और आज इक्कीसवीं सदी तक उसकी छवि एक सशक्त खलनायक के रूप में स्थापित है। यह उपन्यास उसी रावण के दशानन से रावण बनने तक का वृत्तांत है जो अपने समस्त गुणों के बावजूद आज तक उपेक्षित तथा तिरस्कृत है।
कहीं न कहीं आज का समाज भी उसी दौर से गुजर रहा है जिनसे सदियों पूर्व दशानन, रावण गुजरा था। रावण तथा शिव के संवादों के माध्यम से इसी साम्यता को चिन्हित कर आज के परिप्रेक्ष्य में रावण का वृत्तांत अपने चरित्र से सीखने की प्रेरणा देता है और साथ ही उन अवगुणों से बचने की शिक्षा भी जो एक समस्त गुणों से युक्त व्यक्ति को खलनायक बना सकते हैं।
इस उपन्यास के प्रारम्भ से रावण ने स्वयं को दशानन नाम से ही सम्बोधित किया है क्योंकि रावण का वास्तविक नाम ‘दशानन’ ही था। ‘रावण’ नाम तो शिव ने उसे काफी बाद में प्रदान किया था। स्वयं अपनी कहानी कहता रावण अपनी उन सभी बुराईयों को स्वयं ही उजागर करता है, जिसके फलस्वरूप मिली पीड़ा को वह आज भी भोग रहा है। उक्त मौके पर अधिवक्ता बृजेश गिरी, अधिवक्ता धीरज त्रिवेदी, लक्ष्या गिरी, बादल सिंह उपस्थित थे।

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